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मैक्स हॉस्पिटल देहरादून में रोबोटिक तकनीक से किडनी ट्रांसप्लांट की बड़ी सफलता

देहरादून : उत्तराखंड में आधुनिक चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने 19 वर्षीय युवती का रोबोटिक तकनीक से सफल किडनी ट्रांसप्लांट कर उसे नया जीवन दिया। इस जटिल ऑपरेशन की सबसे भावुक बात यह रही कि युवती की 42 वर्षीय मां ने अपनी एक किडनी दान कर बेटी की जिंदगी बचाई।

एक साल से क्रॉनिक किडनी डिजीज से जूझ रही थी युवती :-
जानकारी के अनुसार, युवती पिछले लगभग एक वर्ष से आनुवंशिक (जेनेटिक) कारणों से होने वाली क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) से पीड़ित थी। बीमारी बढ़ने के साथ उसकी दोनों किडनियों ने लगभग काम करना बंद कर दिया था, जिसके कारण वह नियमित डायलिसिस पर निर्भर हो गई थी। स्थायी उपचार के लिए उसे मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून लाया गया, जहां विशेषज्ञों ने किडनी ट्रांसप्लांट की सलाह दी।

मां ने पेश की ममता और त्याग की मिसाल :-
बेटी की जान बचाने के लिए उसकी 42 वर्षीय मां ने अपनी एक किडनी दान करने का निर्णय लिया। सभी जरूरी मेडिकल जांचों के बाद डॉक्टरों ने उनकी किडनी को ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त पाया और ऑपरेशन की तैयारी शुरू की।

रोबोटिक तकनीक से किया गया जटिल ऑपरेशन :-
डॉक्टरों के अनुसार, मरीज का वजन सामान्य से अधिक होने के कारण पारंपरिक ओपन सर्जरी में संक्रमण, अधिक दर्द और रिकवरी में अधिक समय लगने का खतरा था। ऐसे में मेडिकल टीम ने अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला किया रोबोटिक सिस्टम की सहायता से छोटे-छोटे चीरे लगाकर ऑपरेशन किया गया, जिससे सर्जरी अधिक सटीक रही, शरीर को कम नुकसान पहुंचा, दर्द कम हुआ और मरीज तेजी से स्वस्थ हो सकी।

ट्रांसप्लांट पूरी तरह सफल, मरीज की रिकवरी बेहतर :-
डॉक्टरों ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट पूरी तरह सफल रहा और मरीज की रिकवरी भी संतोषजनक है। फिलहाल युवती डॉक्टरों की निगरानी में है और उसकी नई किडनी सामान्य रूप से कार्य कर रही है।

डॉ. दीपक गर्ग बोले- रोबोटिक तकनीक बदल रही है ट्रांसप्लांट का भविष्य :-
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून के डॉ. दीपक गर्ग ने कहा कि रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट विशेष रूप से उन मरीजों के लिए बेहद लाभकारी है, जिनका वजन अधिक है या जिनमें सामान्य सर्जरी का जोखिम ज्यादा होता है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से ऑपरेशन अधिक सटीक होता है और मरीज पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में कम दर्द के साथ जल्दी स्वस्थ हो जाता है।

जीवनभर दवाइयों और नियमित जांच की जरूरत :-
डॉ. गर्ग ने बताया कि ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को जीवनभर डॉक्टरों की निगरानी में रहना होगा। नई किडनी को स्वस्थ बनाए रखने के लिए नियमित दवाइयों का सेवन, समय-समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी होगा।

उत्तराखंड में आधुनिक ट्रांसप्लांट सेवाओं को मिली नई पहचान :-
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में सफल रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट को उत्तराखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे अब राज्य और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को विश्वस्तरीय रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा अपने ही प्रदेश में उपलब्ध हो सकेगी।

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