
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत की हाल ही में एक मामले की सुनवाई करते हुए की गई टिप्पणी चर्चा में है। एक वकील की याचिका की सुनवाई के दौरान उन्होंने बेरोजगार युवाओं को कॉकरोच की तरह बताया था। बाद में उन्होंने सफाई भी दी और कहा कि उन्होंने सिर्फ फर्जी डिग्री वालों की आलोचना की थी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें युवाओं पर गर्व है। हालांकि, उनके कॉकरोच वाले बयान से लेकर उनकी सफाई के बीच एक ऐसा घटनाक्रम हुआ, जो इस वक्त देशभर में वायरल ट्रेंड बन चुका है। यह ट्रेंड है – कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का, जिसे लेकर न सिर्फ सोशल मीडिया पर चर्चा जारी है, बल्कि महुआ मोइत्रा, मनीष सिसोदिया और अखिलेश यादव जैसे नेता तक इस पर बात कर रहे हैं।
15 मई को सीजेआई की कॉकरोच वाली टिप्पणी के बाद बनी इस पार्टी ने 21 मई आते-आते इंस्टाग्राम पर इसने फॉलोवर्स के मामले में देश के सबसे बड़े राजनीतिक दल भाजपा तक को पीछे कर दिया है। फिलहाल कॉकरोच जनता पार्टी के इंस्टाग्राम पेज पर 1.35 करोड़ फॉलोवर्स हैं। जो देश के दोनों बड़े राजनीतिक दलों से ज्यादा है। भाजपा के 88 लाख से ज्यादा फॉलोवर्स हैं। वहीं, कांग्रेस के फॉलोवर्स की संख्या 1.33 करोड़ है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर यह कॉकरोच जनता पार्टी क्या है? इसने अपने मकसद को लेकर क्या-क्या कहा है? इसमें शामिल होने की क्या शर्तें रखी गई हैं? इसकी स्थापना करने वाले अभिजीत दिपके कौन हैं? उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी बनाने की क्या वजह बताई है? उनका आम आदमी पार्टी के संस्थापक अरविंद केजरीवाल से क्या संबंध सामने आया है? इसके अलावा अगर यह पार्टी अपने मकसद पर कायम रहती है तो भारत की राजनीति मे क्या बदलाव ला सकती है?
पहले जानें – क्या है कॉकरोच जनता पार्टी, इसका मकसद क्या ?-
कॉकरोच जनता पार्टी को एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन बताया जा रहा है। सीजेआई सूर्यकांत के 15 मई को दिए बयान के बाद 16 मई 2026 को इंटरनेट पर एक व्यंग्य के रूप में शुरू हुआ यह आंदोलन कुछ ही दिनों में भारत के युवाओं, खासकर जेन जी के बीच लोकप्रियता बटोरने में सफल हुआ है।
पार्टी का यह नाम भी भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की उसी टिप्पणी से उपजा है, जिसमें उन्होंने बिना रोजगार वाले और सोशल मीडिया पर अपनी राय रखने वाले युवाओं की तुलना कॉकरोच (तिलचट्टे) और परजीवी से की थी। हालांकि, सीजेआई ने स्पष्ट किया कि उनका इशारा फर्जी डिग्री वालों की तरफ था, लेकिन सोशल मीडिया पर कई हैंडल्स ने इस शब्द को एक राजनीतिक पहचान के तौर पर उठाना शुरू कर दिया। यह पार्टी खुद को आलसी और बेरोजगार युवाओं की आवाज कहती है।
इस पार्टी का मकसद क्या है ?-
भले ही यह आंदोलन व्यंग्य के रूप में शुरू हुआ हो, लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी ने अपने मुख्य मकसद में भारतीय राजनीतिक व्यवस्था की विफलताओं पर निशाना साधा है और युवाओं की अनदेखी के विरोध में लगातार पोस्ट किए हैं। इस पार्टी ने अब तक मुख्यतः तीन मकसद बताए हैं…
1. राजनीतिक विमर्श में बदलाव : सीजेपी ने अपना एक मकसद बताया है कि भारत की राजनीति पिछले एक दशक से केवल हिंदू-मुस्लिम जैसे ध्रुवीकरण वाले मुद्दों पर सिमटी हुई है। ऐसे में इस आंदोलन का उद्देश्य राजनीति का ध्यान असल मुद्दों जैसे रोजगार, शिक्षा, एआई, उद्योग के विकास और स्वच्छ ऊर्जा की तरफ केंद्रित करना है।
2. व्यवस्था की जवाबदेही तय करना : प्लेटफॉर्म के मुताबिक, युवाओं को लगता है कि सिस्टम उन्हें नजरअंदाज कर रहा है। ऐसे में सीजेपी ने अपना मकसद सरकार और विपक्ष को नीट परीक्षा के पेपर लीक और उसके कारण छात्रों की आत्महत्या जैसी गंभीर विफलताओं के प्रति जवाबदेह बनाना बताया है।
3. लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता : प्लेटफॉर्म ने अपना मकसद भारत में न्यायपालिका, चुनाव आयोग और मीडिया जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं को पूरी तरह से स्वतंत्र बनाना रखा है।
पार्टी का 5-सूत्रीय घोषणापत्र भी जारी :-
इसने व्यंग्य के साथ-साथ व्यवस्था में सुधार के लिए कुछ बेहद सख्त और स्पष्ट मांगें रखी हैं।
1. न्यायपालिका की स्वतंत्रता : किसी भी मुख्य न्यायाधीश को रिटायरमेंट के बाद इनाम के तौर पर राज्यसभा की सीट या कोई अन्य पद नहीं दिया जाएगा।
2. वोटों की सुरक्षा : जायज वोट काटने वाले चुनाव आयुक्तों को आतंकी कानून (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया जाएगा, क्योंकि लोगों के वोट के अधिकार को छीनना एक तरह का आतंक है।
3. महिलाओं को 50% आरक्षण : संसद और कैबिनेट में महिलाओं को 33% नहीं, बल्कि पूरे 50% आरक्षण दिया जाए।
4. दलबदल पर रोक : पाला बदलने वाले विधायकों/सांसदों को अगले 20 साल तक चुनाव लड़ने या किसी सार्वजनिक पद पर रहने से अयोग्य घोषित किया जाए।
5. मीडिया एकाधिकार का अंत : अंबानी और अदाणी जैसे प्रभावशाली उद्योगपतियों के स्वामित्व वाले मीडिया हाउस के लाइसेंस रद्द किए जाएं।
इस व्यंग्य प्लेटफॉर्म से जुड़ने की शर्तें क्या हैं ?-
वैसे तो कॉकरोच जनता पार्टी कोई राजनीति दल न होकर सिर्फ एक व्यंग्य प्लेटफॉर्म है, लेकिन मौजूदा समय में यह अपने आप को एक सियासी दल की तरह ही पेश कर रहा है। स्थिति यह है कि जब सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ने के बारे में पूछा तो इस पेज ने कुछ पात्रता शर्तें भी रख दीं। एक व्यंग्यात्मक (satirical) आंदोलन होने की वजह से इसमें शामिल होने की पात्रता शर्तें भी व्यंग्य से भरी हुईं और बेहद अनोखी हैं।
- बेरोजगार होना पार्टी से जुड़ने की सबसे पहली शर्त है, चाहे वह बेरोजगारी मजबूरी के कारण हो, अपनी मर्जी से चुनी गई हो, या फिर उसूलों की वजह से हो।
- व्यक्ति का शारीरिक रूप से निष्क्रिय (आलसी) होना आवश्यक है, भले ही उसका दिमाग लगातार उलझनों में दौड़ता रहे।
- उम्मीदवार को दिन में कम से कम 11 घंटे इंटरनेट पर बिताना होगा, यहां तक कि बाथरूम ब्रेक के दौरान भी ऑनलाइन रहना अनिवार्य है।
- सदस्य को पेशेवर रूप से भड़ास निकालने या शिकायतें करने में कुशल होना चाहिए। इसके साथ शर्त यह है कि आपकी यह भड़ास तीखी, ईमानदार और देश के उन असल मुद्दों पर होनी चाहिए जो वास्तव में मायने रखते हैं।
पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके के मुताबिक, इन व्यंग्यात्मक योग्यताओं को तय करने का विचार उन्हें सीधे तौर पर मुख्य न्यायाधीश की उस टिप्पणी से आया था, जिसमें युवाओं को आलसी और बिना काम-धाम वाला बताया गया था।

अब जानें- कौन हैं अभिजीत दिपके, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक ?-
कॉकरोच जनता पार्टी के साथ ही जो एक नाम सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है, वह है अभिजीत दिपके का। अभिजीत 30 वर्षीय भारतीय छात्र हैं। उन्होंने पुणे से पत्रकारिता में अपना ग्रैजुएशन पूरा किया है और हाल ही में अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर डिग्री हासिल की है। बताया गया है कि फिलहाल वह अमेरिका में ही रह रहे हैं और कॉकरोच जनता पार्टी की स्थापना से पहले वहां नौकरियों के लिए आवेदन कर रहे थे। मौजूदा समय में वह खुद को बेरोजगार बताते हैं।
हालांकि, ऐसा नहीं है कि अभिजीत अब तक बेरोजगार ही रहे हैं। रिपोर्ट्स और खुद अभिजीत दिपके के अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म्स को दिए इंटरव्यू के मुताबिक, वह पेशे से एक राजनीतिक संचार रणनीतिकार हैं। वह नैरेटिव (विमर्श) बनाने, पब्लिक मैसेजिंग और लोगों की राजनीतिक राय पर डिजिटल प्लेटफार्मों के प्रभाव को समझने के विशेषज्ञ हैं और एक राजनीतिक दल के लिए काम भी कर चुके हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी बनाने का ख्याल कैसे आया ?-
अभिजीत के एक इंटरव्यू के मुताबिक, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) ने युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवी से की, तो उन्होंने इसे व्यक्तिगत तौर पर महसूस किया और व्यंग्य करते हुए कहा कि मैं ही वह कॉकरोच हूं जिसके बारे में मुख्य न्यायाधीश बात कर रहे थे। उन्होंने इसी टिप्पणी को एक हथियार बनाया और भारतीय युवाओं की हताशा को मंच देने के लिए 16 मई 2026 को एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन के रूप में कॉकरोच जनता पार्टी प्लेटफॉर्म की शुरुआत कर दी।
आगे चुनाव में उतरने की क्या है योजना ?-
अभिजीत दिपके के अनुसार, चूंकि यह आंदोलन अभी कुछ ही दिन पुराना है, इसलिए फिलहाल 2029 के चुनावों में हिस्सा लेने को लेकर कोई स्पष्ट फैसला नहीं किया गया है। अभिजीत के मुताबिक, चुनाव लड़ने की घोषणा करने के बजाय, उनकी तात्कालिक योजना उन युवाओं और लोगों से बात करने, उनकी चिंताओं को सुनने और आगे क्या कदम उठाया जाना चाहिए, इस पर उनके सुझाव लेने की है। अभिजीत के मुताबिक, वे अपना एक स्वतंत्र जन-आंदोलन शुरू कर रहे हैं। आंदोलन से जुड़े जेन जी (Gen Z) युवाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी इस मुहिम में किसी भी अन्य मौजूदा राजनीतिक दल को शामिल नहीं होने देना चाहते हैं।
अभिजीत दिपके का आप-अरविंद केजरीवाल से क्या रहा है जुड़ाव ?-
अभिजीत अपने राजनीति में काम करने से जुड़े इतिहास को लेकर भी एक मीडिया समूह से बात कर चुके हैं। उनका कहना है कि वह पेशे से एक राजनीतिक संचार रणनीतिकार रहे हैं और शुरुआत में ही आम आदमी पार्टी (आप) के साथ जुड़े थे। अभिजीत ने 2020 से 2023 के बीच आम आदमी पार्टी के साथ काम किया था। वह पार्टी की सोशल मीडिया और चुनाव प्रचार मशीनरी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे और कुछ समय के लिए उन्होंने संचार प्रभारी के रूप में भी कार्य किया था।
2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में अरविंद केजरीवाल की जीत के दौरान, अभिजीत ने मीम-आधारित डिजिटल प्रचार पर काम किया था। इससे पार्टी के राजनीतिक संदेशों को आकार देने और युवाओं तक उनकी पहुंच बनाने में काफी मदद मिली थी। अभिजीत का कहना है कि वे अरविंद केजरीवाल के स्वास्थ्य और शिक्षा मॉडल से बहुत प्रेरित थे। उनका मानना था कि भारतीय राजनीति में स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दे चर्चा से गायब थे, लेकिन केजरीवाल ने उन पर सकारात्मक काम किया, जिसने उन्हें पार्टी में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
हालांकि, 2023 में अभिजीत ने महसूस किया कि उन्हें अपने निजी जीवन में आगे बढ़ने और आर्थिक स्थिरता पर ध्यान देने की आवश्यकता है। इसलिए उन्होंने ब्रेक लिया, उच्च शिक्षा के लिए आवेदन किया और फिर अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए चले गए। हालांकि, कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अभिजीत दिपके के पुराने पोस्ट के स्क्रीनशॉट साझा किए जा रहे हैं, जिनमें ब्रेक लेने के बाद भी उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट कर आप नेता मनीष सिसोदिया का आभार जताया था और कहा था कि कोई भी दूरी आम आदमी पार्टी के लिए मेरी प्रतिबद्धता को कमजोर नहीं कर सकती। अमर उजाला इन वायरल स्क्रीनशॉट की पुष्टि नहीं करता।
कॉकरोच जनता पार्टी पर किस-किस नेता ने दी है प्रतिक्रिया ?-
कई प्रमुख नेताओं ने कॉकरोच जनता पार्टी का समर्थन किया है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस पार्टी के इंस्टाग्राम अकाउंट को फॉलो करने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा बीजेपी बनाम सीजेपी।
इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता महुआ मोइत्रा और कीर्ति आजाद ने इस अनौपचारिक राजनीतिक मोर्चे का समर्थन करने के साथ-साथ, इसके सदस्य के रूप में साइन-अप करने वाले पहले कुछ नेताओं में से थे। दूसरी तरफ आप के नेता मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और पूर्व सदस्य प्रशांत भूषण ने भी जन-आंदोलन को अपना खुला समर्थन दिया है।
जिस जेन जी की आवाज बनकर उभरी कॉकरोच जनता पार्टी, उनका कितना प्रभाव ?-
स्नैपचैट की पैरेंट कंपनी स्नैप और थिंक टैंक बॉस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) के 2024 तक के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में तब 37.7 करोड़ जेन जी युवा थे, जो देश के इतिहास की सबसे बड़ी पीढ़ी है और यह चीन के जेन जी युवाओं से भी ज्यादा है। वर्तमान में देश के कुल उपभोक्ता खर्च का 43% यानी 860 अरब डॉलर खर्च यह पीढ़ी करती है। अनुमान है कि 2030 तक इस पीढ़ी की न सिर्फ ताकत बढ़ेगी, बल्कि इसका उपभोक्ता खर्च 1.3 ट्रिलियन और 2035 तक दो ट्रिलियन तक पहुंच जाएगा, जिसका मतलब यह है कि भविष्य में देश का हर दूसरा रुपया इसी पीढ़ी द्वारा खर्च किया जाएगा।




