वयोवृद्ध किसान अम्बरीश चन्द्र गुप्ता का आरोप भ्रष्टाचार और पेनल्टी के डर से आंखें मूंदे बैठा है तंत्र, जिम्मेदारों पर हो कठोर कार्रवाई

- दिल्ली-ऋषिकेश नेशनल हाईवे किनारे जलभराव से किसानों पर करोड़ों की मार : NHAI और स्थानीय प्रशासन की आपराधिक लापरवाही के खिलाफ 83 वर्षीय बुजुर्ग किसान ने मांगी विजिलेंस जांच
हरिद्वार। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और स्थानीय प्रशासन की कथित आपराधिक लापरवाही व दोषपूर्ण निर्माण कार्यों के चलते गरीब किसानों और ग्रामीणों के जीवन पर गहरा संकट मंडरा रहा है। दिल्ली-ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-334) के किनारे जल निकासी (नालों) की समुचित व्यवस्था न होने और पुराने प्राकृतिक जल मार्गों के अवरुद्ध होने के कारण पिछले लगभग 10 वर्षों से क्षेत्र में भीषण जलभराव की समस्या बनी हुई है। इस ‘मानव निर्मित’ त्रासदी के खिलाफ ज्वालापुर (हरिद्वार) निवासी 83 वर्षीय वयोवृद्ध वरिष्ठ नागरिक एवं किसान अम्बरीश चन्द्र गुप्ता ने तंत्र के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मामले की उच्च स्तरीय सतर्कता (Vigilance) जांच की मांग की है।

शिकायतकर्ता अम्बरीश चन्द्र गुप्ता के अनुसार, पतंजलि विश्वविद्यालय के निकट स्थित नदी से लेकर बढेरी गांव तक नेशनल हाईवे संख्या 334 के दोनों ओर जलनिकासी के लिए नालों का निर्माण नहीं किया गया है अथवा वे अतिक्रमण व भराव के कारण पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं। बरसात के पानी की निकासी न होने से हाईवे से सटी सैकड़ों हेक्टेयर उपजाऊ कृषि भूमि कई-कई महीनों तक जलमग्न रहती है। किसानों की लहलहाती फसलें, फलदार बाग-बगीचे और आवासीय संपत्तियां सड़कर बर्बाद हो रही हैं, जिससे अब तक करोड़ों रुपये का भारी नुकसान हो चुका है आर्थिक तंगी और दाने-दाने की मोहताजी के चलते कई गरीब किसान अपनी पुस्तैनी जमीनों और आशियानों को औने-पौने दामों पर बेचने के लिए विवश हो गए हैं।

वयोवृद्ध किसान ने अपने विस्तृत शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि इस मानवीय व आर्थिक त्रासदी को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय, जिला प्रशासन और NHAI को सैकड़ों प्रार्थना पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदकर बैठे हैं। पत्र में सतर्कता जांच के लिए निम्नलिखित बिंदु उठाए गए हैं।
तकनीकी खामियां और भ्रष्टाचार छिपाने की कोशिश :- NHAI के अधिकारी अपनी तकनीकी चूकों, घटिया निर्माण और डिजाइन की खामियों पर पर्दा डालने में जुटे हैं, ताकि उन पर किसी प्रकार का आर्थिक दंड (पेनल्टी) या विभागीय गाज न गिरे। प्रशासनिक स्तर पर बार-बार शिकायतों के बावजूद स्थलीय निरीक्षण और जल निकासी का समाधान न कराना अधिकारियों की संदिग्ध संलिप्तता को दर्शाता है।

कार्रवाई से पीछे हटता तंत्र :- जनहित और संविधान प्रदत्त जीवन के अधिकारों का खुला हनन हो रहा है, जबकि पूरा तंत्र भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देने में लगा है।

83 वर्षीय अम्बरीश चन्द्र गुप्ता ने शासन और उच्च अधिकारियों से करबद्ध निवेदन करते हुए आग्रह किया है कि इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए NHAI के संबंधित अभियंताओं और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका की स्वतंत्र विजिलेंस (सतर्कता) जांच कराई जाए। किसानों को हुए करोड़ों रुपये के नुकसान का पारदर्शी आकलन कराकर पीड़ितों को उचित मुआवजा दिलाया जाए। हाईवे के दोनों ओर युद्धस्तर पर पक्के नालों का निर्माण कराकर जलभराव की समस्या से हमेशा के लिए निजात दिलाई जाए और लापरवाह अधिकारियों पर कठोरतम कानूनी व विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाए।
रिपोर्ट – दीन रज़ा




