क्या है साइलेंट मैनिपुलेशन के संकेत, जो रिश्ते में खाई खोदने का करते हैं काम

एक स्वस्थ रिश्ते की बुनियाद आपसी विश्वास, सम्मान और खुले संवाद पर टिकी होती है, लेकिन कुछ लोग रिश्तों को कंट्रोल करने के लिए “साइलेंट मैनिपुलेशन” को अपनाते हैं।
स्वस्थ रिश्ते विश्वास, संचार और आपसी सम्मान पर आधारित होते हैं, फिर चाहे रिश्ता दोस्ती का हो, शादी के बंधन में बंधे साथी से हो या बहन-भाई से। लेकिन अगर यही रिश्ता आपको बार-बार लगातार महसूस कराए कि आप ही गलत हैं तो? हो सकता है, आप उन्हें समझाने की कोशिश करें, लेकिन अगर वह ना समझें, चुप्पी साध लें और आपको नजरअंदाज करें तो यह “साइलेंट मैनिपुलेशन” हो सकता है।
इस व्यवहार को समझें :-
यह भावनात्मक नियंत्रण का एक तरीका है, जिसमें दूसरा व्यक्ति अपनी खामोशी और व्यवहार से आपकी मानसिक स्थिति पर प्रभाव डालता है। इस दौरान वह आपके ऊपर ना तो चिल्लाता है और ना ही आपकी आलोचना करता है। धीरे-धीरे यह रिश्ते में एक बड़ी खाई खोदने का काम करता है, जिससे बचने के लिए जरूरी है खुद की भावनाओं को समझना।

गहरा असर :-
साइलेंट मैनिपुलेशन आपके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालता है। लगातार अनदेखी और खामोशी आपको आत्म संदेह में डाल देती है। धीरे-धीरे आप भी मानने लगती हैं कि गलती आपकी ही है। एक तरफ आप लगातार समझौते करती रहती हैं, दूसरी तरफ सामने वाला अपनी खामोशी से आपको नियंत्रित करता रहता है। यह एक ऐसा चक्र बना देता है, जो रिश्ते को पूरी तरह खत्म कर मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं को बढ़ावा देता है।
कैसे करें पता :-
गलती आपकी हो या ना हो, लेकिन आपको ही दोषी ठहराना, आपके समझाने पर चुप्पी साध लेना, बात करना बंद कर देना और लगातार आपको महसूस कराना कि आप ही गलत हैं, साइलेंट मैनिपुलेशन का संकेत होता है। इस दौरान हर छोटी-छोटी बात पर आपसे बात करना बंद कर देना, कुछ पसंद न आने पर आपको नजरअंदाज करना और बातों को अनसुना करना, ये सब आपको इमोशनली कंट्रोल करके आपसे अपनी मर्जी के मुताबिक कार्य कराने के तरीके होते हैं।

खामोशी ना हो हावी :-
साइलेंट मैनिपुलेशन जितना शांत दिखाई देता है, भीतर से इसका शोर इन्सान को उतना ही खोखला बना देता है। यदि आपके रिश्ते में संवाद की खाई खुद चुकी है तो समय रहते सही कदम उठाएं। अपनी भावनाओं को एक-दूसरे से शांतिपूर्वक व्यक्त करें। दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे का सम्मान करना और खुलकर अपने विचार रखना ही एक स्वस्थ रिश्ते की पहचान है। संवाद रिश्तों को मजबूत करता है और खामोशी दूरी बढ़ाती है। हालांकि इन सबके बाद भी यदि रिश्ते में सुधार ना आए तो मनोवैज्ञानिक से मदद भी ली जा सकती है।
आप खुद को संभाल सकती हैं… :-
फैमिली रिलेशनशिप काउंसलर बताती हैं, ऐसे मित्रों या संबंधियों से हमेशा सावधान रहें, जो खुद कम बोल कर आपसे सब बुलवा लेते हैं। आज के समाज में ऐसे लोगों की कोई कमी नहीं है, जिनके दो चेहरे होते हैं। अपनी असहमति या मनोभावों को शब्द तो क्या, हाव-भाव से भी प्रकट नहीं होने देना इन की कुशलता होती है। ये लोग चुप रहकर आपसे सब कुछ मनवा लेते हैं, जिससे केवल इनका लाभ होता है। यही साइलेंट मैनिपुलेशन है। ऐसे में क्या करें? तो जवाब है, अपने इरादे और योजनाएं तब तक किसी को न बताएं, जब तक कि वे मूर्तमान ना हो चुके हों। कार्य का अधूरा रह जाना या असफल हो जाना आपके आत्मविश्वास में कमी ला सकता है। याद रखें, स्वयं को संभाल पाने की क्षमता हर किसी में होती है।



