श्रावणी उपाकर्म एवं रक्षाबंधन पर किया गया आर्य समाज में विशेष यज्ञ

- यज्ञोपवीत संस्कार के महत्व पर दिया गया संदेश, नेपाल आपदा में मृतकों को दी श्रद्धांजलि
आर्य समाज सरसावा में श्रावणी उपाकर्म एवं रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन यज्ञ के साथ किया गया। कार्यक्रम में वैदिक विधि-विधान से यज्ञ संपन्न कराया गया। यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य डॉ. संदीप आनंद रहे, जबकि यज्ञमान के रूप में राजेश आर्य एवं उनकी धर्मपत्नी उपस्थित रहीं।
इस अवसर पर यज्ञोपवीत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आचार्य डॉ. संदीप आनंद ने कहा कि यज्ञोपवीत हमारी वैदिक संस्कृति का प्रतीक चिन्ह है, जो व्यक्ति को अपने संस्कारों, कर्तव्यों और नैतिक दायित्वों के प्रति सजग करता है। इसे केवल परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि जीवन में श्रेष्ठ आचरण का संकल्प लेकर धारण करना चाहिए।
यज्ञोपवीत व्यक्ति को माता-पिता एवं गुरु के प्रति अपने दायित्वों और ऋणों का स्मरण कराता है तथा उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित करता है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों को विधिवत यज्ञोपवीत धारण कराया गया। साथ ही नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा से हुई भारी जन-धन की क्षति पर गहरी संवेदना व्यक्त की गई। दिवंगतों की आत्मा की शांति के लिए उपस्थित लोगों ने एक मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम के समापन से पूर्व सभी ने एक-दूसरे को श्रावणी उपक्रम एवं रक्षाबंधन पर्व की शुभकामनाएं दीं। इसके बाद प्रसाद वितरण किया गया।
इस अवसर पर आचार्य डॉ. संदीप आनंद, राजेश आर्य, प्रवीण फौजी आर्य, अवनीश आर्य, कुलदीप आर्य, संजीव आर्य, प्रवीण आर्य, राजेंद्र पाल, अंकित पाल, आर्यवीर अनंत आराध्या आर्या दीक्षित शर्मा जयप्रकाश आर्य सहित बड़ी संख्या में आर्य समाज के सदस्य एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
भगवत प्रसाद – जिला संवाददाता सहारनपुर




