माँ शाकुम्भरी विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षान्त समारोह का हुआ आयोजन, माननीया कुलाधिपति एवं श्री राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने वर्चुअल माध्यम से किया संबोधित

- 22,315 उपाधियों को किया गया डिजीलॉकर में प्रविष्ट
- 7,582 छात्र तथा 14,733 छात्राएं रही शामिल
- 99 स्वर्ण पदक किये गये वितरित
- छात्र डिजीलॉकर में प्रविष्ट उपाधियों को डाउनलोड कर करें इसका उपयोग
- माननीय राज्यपाल महोदया ने डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को दी शुभकामनाएं एवं बधाई
- 16 जुलाई से संचालित नशा मुक्त भारत अभियान को छात्र-छात्राओं से जन-आंदोलन बनाने का किया आह्वान
- आंगनवाडी कार्यकत्रियों को वितरित किये गये 700 किट
- विभिन्न कक्षावर्गों में कराई गई प्रतियोगिताओं में प्रथम आए बच्चों को वितरित किए गये पुरूस्कार
- विश्वविद्यालय में अध्ययनरत सभी विद्यार्थी एक पेड माँ के नाम अवश्य लगाए एवं उन्हें संरक्षित करने का भी संकल्प लें
- राज्यपाल महोदया ने ’’जीवन भर सीखते रहो’’ का विद्यार्थियों को दिया मंत्र
- कर्तव्यों के ईमानदारी से निर्वहन, समाज सेवा की भावना तथा स्वास्थय, शिक्षा, पर्यावरण एवं नवाचार के क्षेत्रों में सक्रिय योगदान से होगा विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार
सहारनपुर, दिनांक 21 जुलाई, 2026 (सू0वि0)।
माँ शाकुम्भरी विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षान्त समारोह का आयोजन सेठ गंगा प्रसाद माहेश्वरी सभागार जनमंच में माननीया कुलाधिपति एवं श्री राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल की वर्चुअल माध्यम से गरिमामयी उपस्थिति एवं अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ।

समारोह में मुख्य अतिथि निदेशक भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, मोहाली पंजाब प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी उपस्थित रहें। विशिष्ट अतिथि राज्य मंत्री उच्च शिक्षा श्रीमती रजनी तिवारी एवं राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी/अपर मुख्य सचिव स्तर, जन भवन लखनऊ डॉ. सुधीर एम. बोबड़े उपस्थित रहे।
सर्वप्रथम कुलपति महोदय द्वारा विश्वविद्यालय की प्रगति आख्या को प्रस्तुत किया गया। मा. कुलाधिपति ने उपाधि एवं पदक प्राप्तकर्ताओं को संकायाध्यक्षों द्वारा कुलपति के समक्ष प्रस्तुतिकरण एवं कुलपति द्वारा उनका उपाधि में प्रविष्टीकरण की घोषणा की गई। मा. कुलाधिपति महोदया द्वारा सम्बन्धित विद्यार्थियों को पदकों/पुरस्कारों का वितरण किया गया, जिसमें कुल 87 पदक प्राप्तकर्ता विद्यार्थियों को जिनमें 6 कुलाधिपति स्वर्ण पदक (संकाय में सर्वोच्च अंक प्राप्तकर्ता 02 छात्र एवं 04 छात्राएं) एवं 6 प्रायोजित स्वर्ण पदक जिसमें एम.ए. (भूगोल) में सर्वोच्च स्थान प्राप्तकर्ता को – स्व. राम सिंह कश्यप स्मृति स्वर्ण पदक, एम.एस.सी. (रसायन विज्ञान) में प्रो. जगदीश सिंह चौहान स्मृति स्वर्ण पदक, एम.ए. (राजनीति विज्ञान) में स्व. राजवाला कृपाल सिंह, स्मृति-स्वर्ण पदक, एम.बी.ए. (ए.आई. एण्ड एम.एल.) में स्व. सरदार सतपाल सिंह जी स्वर्ण पदक, एम.एस.सी. (वनस्पति विज्ञान) में प्रो. येर्रमिल्ली श्रीराम मूर्ति स्वर्ण पदक एवं एम.ए. (इतिहास) में श्री महेन्द्र सिंह ’बाबू जी’ स्मृति पुलस्त्य फाउंडेशन स्वर्ण पदक प्रदान किये गए। इस प्रकार कुल 99 स्वर्ण पदक जिसमें से 87 कुलपति स्वर्ण पदक शामिल रहे।

विश्वविद्यालय परिक्षेत्र में संचालित विभिन्न स्नातक एवं परास्नातक पाठयक्रमों में 22,315 उपाधि प्रदान की गयी । जिसमें 7,582 छात्र तथा 14,733 छात्राओं को उपाधि प्रदान करने के साथ-साथ उन्हे मा. कुलाधिपति महोदया द्वारा डिजीलॉकर में प्रविष्ट भी कराया गया। पदक वितरण के उपरान्त दीक्षोत्सव के विभिन्न कार्यक्रमों की दिग्दर्शिका, भाषणों के संकलन एवं चयनित पेंटिंग्स के संकलन का विमोचन किया गया एवं पर्यावरण के संरक्षण एवं देश भक्ति गीत पर प्राथमिक विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुती की गयी।
माननीय राज्यपाल ने नशा मुक्त भारत अभियान को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि माई भारत पोर्टल के माध्यम से 16 जुलाई से व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। उन्होंने युवाओं से इस अभियान से जुड़ने तथा अपने परिवार एवं समाज को भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नशे से सदैव दूर रहना चाहिए तथा घर-घर जाकर लोगों को भी इसके प्रति जागरूक किया जाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों एवं युवाओं से अपने स्वास्थय का विशेष ध्यान रखने का आह्वान करते हुए नियमित योग, व्यायाम एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने पर बल दिया। साथ ही उन्होंने समाज में स्वास्थय जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से टीबी मुक्त भारत अभियान, मासिक धर्म स्वच्छता जागरूकता अभियान तथा अन्य जनस्वास्थय कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।

श्रीमती आनंदी बेन पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत आज सेमीकंडक्टर व क्वांटम प्रौद्योगिकी, रक्षा एवं एयरोस्पेस जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने स्वदेशी तकनीक एवं अनुसंधान को प्रोत्साहित करने पर बल देते हुए कहा कि युवाओं को नवाचार एवं शोध के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। उन्होंने डीआरडीओ एवं भारतीय एयरोस्पेस क्षेत्र की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। भारत सरकार द्वारा 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु व्यक्तिगत स्तर पर भी प्रयास किये जा रहे है जिसमे अभी-अभी कुछ युवाओं ने मिलकर अंतरिक्ष में 450 किमी. दूर अपना उपग्रह स्थापित किया है। जो निश्चिय ही हमारे लिए अनुकरणीय है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि माँ शाकुम्भरी विश्वविद्यालय भी शिक्षा, नवाचार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रहा है तथा विद्यार्थियों को समाज से जोड़ने वाली गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित कर रहा है।
माननीय कुलाधिपति ने विश्वविद्यालय द्वारा संचालित सामाजिक एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों की भी विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने शिक्षा के साथ-साथ समाज के प्रति अपने दायित्वों का भी प्रभावी निर्वहन किया है। विश्वविद्यालय एवं मण्डल के तीनों जनपदों के जिला प्रशासन के सहयोग से 700 आंगनबाड़ी किटों का वितरण, स्वास्थय परीक्षण शिविर, रक्तदान शिविर, टीबी मुक्त भारत अभियान, नशामुक्त भारत अभियान, महिला स्वास्थय जागरूकता कार्यक्रम, मासिक धर्म कप वितरण, बाल गृह एवं कारागार शैक्षणिक भ्रमण, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, जैव विविधता संरक्षण तथा वर्षा जल संचयन जैसे अनेक कार्यक्रम समाज के प्रति विश्वविद्यालय की संवेदनशीलता को दर्शाते हैं। माननीया ने पूरे प्रदेश में अब तक 66,000 आंगनबाडी किटों के वितरण का भी उल्लेख किया जो उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।

पर्यावरण संरक्षण पर विशेष बल देते हुए माननीय राज्यपाल ने प्रत्येक नागरिक से कम से कम एक पौधा लगाने तथा उसकी नियमित देखभाल करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने जल संरक्षण के लिए ड्रिप इरिगेशन जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। विश्वविद्यालय में अध्ययनरत सभी विद्यार्थी एक पेड माँ के नाम अवश्य लगाए एवं उन्हें संरक्षित करने का संकल्प भी ले। विद्यार्थियों से कुलाधिपति महोदया ने यह भी अपेक्षा की कि वे स्वावलम्बी बनें एवं किसी भी प्रकार से माता-पिता की उपेक्षा न करें। आप सभी के प्रयास से देश मेे चल रहे वृद्धाश्रम बंद हो जाएँगे। अपने संबोधन के अंत में राज्यपाल महोदया ने ’’जीवन भर सीखते रहो’’ का मंत्र भी विद्यार्थियों को दिया। यदि प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करे, समाज सेवा की भावना से कार्य करे तथा स्वास्थय, शिक्षा, पर्यावरण एवं नवाचार के क्षेत्रों में सक्रिय योगदान दे, तो विकसित भारत एवं आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य शीघ्र ही साकार किया जा सकेगा।
दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि प्रो. अनिल त्रिपाठी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्तित्व का निर्माण करना है जो ज्ञान, नैतिक मूल्यों, तकनीकी दक्षता और सामाजिक उत्तरदायित्व से परिपूर्ण हो। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी क्षमताओं को पहचानने तथा निरंतर आत्मविकास की दिशा में कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी विशिष्ट प्रतिभा एवं पहचान विकसित करने की आवश्यकता है। जीवन में सफलता केवल शैक्षणिक उपलब्धियों से नहीं मिलती, बल्कि व्यक्तित्व के समग्र विकास से प्राप्त होती है। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ खेलकूद, समाज सेवा, सांस्कृतिक गतिविधियों तथा अन्य रचनात्मक क्षेत्रों में भी सक्रिय सहभागिता निभानी चाहिए, जिससे उनका सर्वांगीण विकास हो सके।

प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि आज का युग नई तकनीकों और नवाचार का युग है। आने वाले समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं ऑटोमेशन जीवन और कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनने जा रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को इन आधुनिक तकनीकों को समझते हुए स्वयं को समयानुकूल तैयार करना होगा, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों एवं अवसरों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें। उन्होंने कहा कि माँ शाकुम्भरी विश्वविद्यालय एक नवोदित विश्वविद्यालय होने के बावजूद गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय प्रदेश एवं समाज की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा विद्यार्थियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षित एवं सक्षम बनाने के लिए सतत प्रयासरत है।
प्रो. त्रिपाठी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का महत्व समय के साथ और अधिक बढ़ता जा रहा है। इसलिए प्रत्येक विद्यार्थी को अपने जीवन में अनुशासन, निरंतर अध्ययन, सकारात्मक सोच तथा सीखने की जिज्ञासा बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में अवसरों की कोई कमी नहीं होती, आवश्यकता केवल उन्हें पहचानने और उनका सही समय पर सदुपयोग करने की होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अधिक से अधिक ज्ञान अर्जित करें, पुस्तकें पढ़ें तथा अपने बौद्धिक दायरे का निरंतर विस्तार करें। उन्होंने कहा कि जितना अधिक व्यक्ति सीखता है, उतना ही उसका आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकसित होता है तथा वह समाज और राष्ट्र के लिए अधिक उपयोगी बनता है।

प्रो. त्रिपाठी ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि सरस्वती का मूल्यांकन कभी धन-संपत्ति से नहीं किया जा सकता। ज्ञान ऐसा अमूल्य धन है जो व्यक्ति के जीवन को दिशा देता है और उसे समाज में विशिष्ट पहचान दिलाता है। इसलिए विद्यार्थियों को ज्ञानार्जन को अपने जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य बनाना चाहिए। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने माँ सरस्वती की कृपा का स्मरण करते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा उनसे राष्ट्र निर्माण, सामाजिक विकास और उत्कृष्ट मानवीय मूल्यों की स्थापना में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
दीक्षांत समारोह के विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश शासन के अपर मुख्य सचिव श्री सुधीर एम. बोबडे ने विद्यार्थियों एवं युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय तीव्र परिवर्तन का दौर है। ऐसे में केवल शैक्षणिक योग्यता ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बदलती तकनीकों, सकारात्मक सोच तथा निरंतर सीखने की प्रवृत्ति को अपनाकर ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभव साझा करते हुए बताया कि शासन स्तर पर किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पूर्व तथ्यों का गहन विश्लेषण किया जाता है। उन्होंने कहा कि विभिन्न विषयों पर परिस्थितियों का सूक्ष्म अध्ययन कर प्रभावी निर्णय लिए जाते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को भी अपने जीवन एवं कार्यक्षेत्र का समय-समय पर मूल्यांकन करते रहना चाहिए।

श्री बोबडे ने स्वयं को ”एक गरीब किसान का बेटा“ बताते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियाँ कभी भी सफलता में बाधा नहीं बनतीं। यदि व्यक्ति में परिश्रम, ईमानदारी और सीखने की इच्छा हो तो वह जीवन में किसी भी ऊँचाई तक पहुँच सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आत्मविश्वास बनाए रखने और अपनी क्षमताओं पर विश्वास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सहारनपुर संभावनाओं से भरपूर जनपद है तथा यहाँ प्रतिभा और अवसर दोनों उपलब्ध हैं। आवश्यकता केवल उन्हें सही दिशा देने और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने की है। अपने संबोधन में उन्होंने अवसंरचना के बेहतर उपयोग पर बल देते हुए कहा कि अनेक स्थानों पर भवन तो निर्मित हो जाते हैं, किन्तु उनका समुचित रखरखाव एवं उपयोग नहीं हो पाता। यदि उपलब्ध संसाधनों का सुनियोजित ढंग से उपयोग किया जाए तो वे विकास की नई दिशा प्रदान कर सकते हैं।
अपर मुख्य सचिव ने विद्यार्थियों को समय के साथ स्वयं को बदलने की सलाह देते हुए कहा कि तकनीक लगातार विकसित हो रही है और लगभग प्रत्येक छह महीने में नए परिवर्तन देखने को मिलते हैं। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को नई तकनीकों को सीखने, स्वयं को अद्यतन रखने तथा नवाचार को अपनाने की आदत विकसित करनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को केवल अपने कार्य तक सीमित न रहकर आसपास की गतिविधियों पर भी सूक्ष्म दृष्टि रखने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए सूक्ष्म अवलोकन की क्षमता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
श्री बोबडे ने अपने संबोधन में सफलता के चार प्रमुख सूत्र भी बताए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी एवं युवा को अपने जीवन में टीम वर्क, कार्यों की स्पष्ट कमान एवं जिम्मेदारी, समय का प्रभावी प्रबंधन तथा सूक्ष्म अवलोकन को अपनाना चाहिए। यही चार सिद्धांत व्यक्ति के व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन को सफल बनाने की मजबूत नींव हैं। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने विद्यार्थियों से सकारात्मक सोच, अनुशासन, निरंतर सीखने की भावना तथा राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण के साथ आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि यही गुण उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना करने में सक्षम बनाएंगे।

विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार की उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती रजनी तिवारी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय ज्ञान, तकनीक और नवाचार का युग है। ऐसे में प्रत्येक विद्यार्थी, विशेषकर युवतियों को अपनी प्रतिभा को पहचानते हुए आत्मनिर्भर बनने की दिशा में निरंतर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही व्यक्ति को समाज में सम्मान, आत्मविश्वास और नई पहचान प्रदान करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि सरकार द्वारा संचालित विभिन्न छात्रवृत्ति, शिक्षा एवं रोजगारोन्मुखी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करें तथा उनका अधिकतम लाभ उठाएँ। उन्होंने कहा कि योजनाओं की जानकारी ही उन्हें अवसरों से जोड़ती है और आत्मनिर्भर बनने का मार्ग प्रशस्त करती है।
श्रीमती रजनी तिवारी ने विद्यार्थियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के छात्रों ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में भी विद्यार्थी अपनी मेहनत, अनुशासन और उत्कृष्ट प्रदर्शन से विश्वविद्यालय एवं प्रदेश का नाम रोशन करेंगे। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता और असफलता दोनों ही सीखने का अवसर प्रदान करती हैं। इसलिए किसी भी परिस्थिति में निराश होने के बजाय प्रत्येक अनुभव से सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से परीक्षा सहित जीवन की प्रत्येक चुनौती का आत्मविश्वास के साथ सामना करने का आह्वान किया।
राज्य मंत्री ने कहा कि आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मशीन लर्निंग क्वांटम तकनीक एवं अन्य आधुनिक प्रौद्योगिकियाँ कार्यशैली को नई दिशा दे रही हैं। विद्यार्थियों को इन उभरती तकनीकों का ज्ञान प्राप्त कर स्वयं को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में नवाचार, उच्च शिक्षा, स्टार्टअप संस्कृति एवं रोजगार सृजन के क्षेत्र में हो रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज युवाओं के लिए नए अवसरों का केंद्र बन रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों से स्टार्टअप एवं उद्यमिता की दिशा में भी आगे बढ़ने का आह्वान किया, जिससे वे रोजगार खोजने वाले नहीं बल्कि रोजगार देने वाले बन सकें। उन्होने विशेष रूप से महिला शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर बल देते हुए कहा कि शिक्षित एवं आत्मनिर्भर बेटियाँ ही समाज और राष्ट्र की वास्तविक शक्ति हैं। उन्होंने कहा कि आज बेटियाँ प्रत्येक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं और समाज को नई दिशा दे रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बेटियों को केवल घर तक सीमित रखने का समय अब बीत चुका है तथा बेटे और बेटियाँ दोनों को समान अवसर और समान शिक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि अपने जीवन में ऐसे महान व्यक्तित्वों से प्रेरणा लें जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने विशेष रूप से डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम सहित अनेक प्रेरणादायी व्यक्तित्वों का उल्लेख करते हुए कहा कि दृढ़ संकल्प, परिश्रम और सकारात्मक सोच से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
अपने संबोधन के अंत में श्रीमती रजनी तिवारी ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि वे निरंतर सीखते रहें, अपने आसपास सकारात्मक वातावरण का निर्माण करें तथा ज्ञान, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ आगे बढ़ते हुए राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि माँ शाकुम्भरी विश्वविद्यालय के विद्यार्थी भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियाँ प्राप्त कर विश्वविद्यालय, प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाएँगे।
दीक्षोत्सव-2026 के अंतर्गत भाषण, चित्रकला, निबंध लेखन एवं काव्य लेखन, देशभक्ति गीत एवं लोक नृत्य प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इसके तहत बेहतर प्रदर्शन करने वालों को पुरस्कृत किया गया।
चतुर्थ दीक्षांत समारोह के अवसर पर मा. कार्यपरिषद एवं संकायाध्यक्ष प्रो. एन.के. तनेजा, प्रो. डी.एन. सिंह, श्रीमती प्रियंका भारद्वाज, प्रो. मनीषा सैनी, प्रो. कुवंरपाल सिंह, डॉ. किरण पाल सिंह, डॉ. रामकुमार, डॉ
कल्पना, श्री जितेन्द्र सिंह, प्रो. सुधीर कुमार, डॉ. अनिल कुमार, प्रो. ओमकार सिंह, प्रो. प्रेम कुमार श्रीवास्तव, प्रो. मुकेश कुमार एवं संकायाध्य प्रो. राकेश कुमार सिंह, प्रो. ममता सिंघल, प्रो. पूनम शर्मा एवं कुलसचिव, श्री कमल कृष्ण, परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजीव कुमार, वित्त अधिकारी, श्री सूरज कुमार, उपकुलसचिव, श्री अनूप कुमार, सहायक कुलसचिव श्री संजीव कुमार, व श्री रमेश सिंह उपस्थित रहे।
उक्त के अतिरिक्त जिला पंचायत अध्यक्ष श्री मांगेराम चौधरी, डॉ. अजय कुमार, महापौर, उत्तराखण्ड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहानी, श्री रविन्द्र मेगलानी अध्यक्ष, सी.आई.एस., श्री एच.एस. चढ्ढा, श्री अमित चौधरी सी. आई. एस., श्री शिव कुमार आरोड़ा, श्री रामजी सूनेजा आई. आई. ए., सुश्री शुभावरी चौहान एवं श्री विशाल गर्ग, उद्यमी स्टार्टअप आदि उपस्थित रहें।




