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ब्लू मून से बुद्ध की चमक तक मई में लगेगा ब्रह्मांड का भव्य मेला, पल-पल बदलेंगे आसामानी मंजर

मई का महीना खगोल विज्ञान प्रेमियों के लिए बेहद रोमांचक रहने वाला है। इस महीने आसमान में कई दुर्लभ और आकर्षक खगोलीय घटनाएं देखने को मिलेंगी जिनमें ब्लू मून, उल्कापात,एस्टेरॉयड, ग्रह-चंद्रमा युति और बुध ग्रह की विशेष स्थिति, शामिल हैं।

इनकी शुरुआत फुल फ्लावर मून से होगी :-
जब 1-2 मई को पूर्णिमा होगी जिसे फुल फ्लावर मून कहा जाता है। यह एक माइक्रोमून भी होगा यानी चंद्रमा पृथ्वी से थोड़ी अधिक दूरी पर होने के कारण सामान्य से थोड़ा छोटा दिखाई देगा। तीन से छह मई के बीच प्रसिद्ध ईटा एक्वारिड उल्कापात अपने चरम पर होगी। यह उल्कापात हैली धूमकेतु के अवशेषों से उत्पन्न होता है। इस दौरान सुबह सूर्योदय से ठीक पहले प्रति घंटे 23 से 50 तक उल्काएं देखी जा सकती हैं।

छह मई को चंद्रमा और मंगल की युति :-
छह मई की शाम आकाश में एक रोचक दृश्य देखने को मिलेगा जब चंद्रमा और मंगल एक-दूसरे के बेहद करीब दिखाई देंगे। यह दृश्य नंगी आंखों से भी देखा जा सकता है और खगोल प्रेमियों के लिए खास आकर्षण होगा। 31 मई को ब्लू मून दिखाई देगा। वहीं ब्लू मून का अर्थ नीले रंग से नहीं बल्कि एक ही महीने में दो बार पड़ने वाली पूर्णिमा से होता है। यह घटना अपेक्षाकृत दुर्लभ होती है।

ग्रहों और चंद्रमा की खास युतियां :-
मई के दूसरे और तीसरे सप्ताह में चंद्रमा विभिन्न ग्रहों के साथ आकर्षक युति बनाता नजर आएगा। 19 मई को चंद्रमा और शनि की युति, सुबह दक्षिण-पूर्व दिशा में दिखाई देगी। 20 मई को चंद्रमा और बृहस्पति की युति, मिथुन तारामंडल के पास दिखेगी। 27 मई को चंद्रमा और शुक्र की बेहद सुंदर जोड़ी, भोर के समय दिखाई देगी।

30 मई को बुध ग्रह का सर्वोत्तम दृश्य :-
30 मई को बुध ग्रह अपनी अधिकतम पश्चिमी दीर्घता पर सूर्योदय से पहले पूर्व दिशा में सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। यह बुध को देखने का साल का सबसे अच्छा मौका माना जाता है। एस्ट्रो फोटोग्राफर प्रमोद सिंह खाती ने बताया कि ये सभी घटनाएं नंगी आंखों से देखी जा सकती हैं और फोटोग्राफी के लिए भी बेहतरीन अवसर प्रदान करेंगी।

एस्टेरॉयड वेस्टा और सुपर न्यू मून भी होंगे आकर्षण :-
मई माह में 3-4 मई को एस्टेरॉयड बेल्ट का दूसरा सबसे बड़ा और सबसे चमकीला एस्टेरॉयड एस्टेरॉयड वेस्टा सबसे अच्छी स्थिति में नजर आएगा।सुपर न्यू मून भी देखने को मिलेगा। इस दौरान 16 मई को चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक होते हुए भी अमावस्या के कारण लगभग अदृश्य रहेगा क्योंकि उसका प्रकाशित हिस्सा पृथ्वी की ओर नहीं होगा लेकिन इस घटना का एक खास पहलू अर्थशाइन है जब चंद्रमा के अंधेरे हिस्से पर पृथ्वी से परावर्तित प्रकाश हल्की चमक पैदा करता है। यह दृश्य बहुत रोमांचक होता है जिसमें चंद्रमा केवल छाया के रूप में नजर आता है।

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