उत्तर प्रदेशदेश

मेटा को बड़ा झटका, फेसबुक-इंस्टाग्राम से घटे करोड़ो यूजर्स, जानें क्या है इसकी वजह

सोशल मीडिया दिग्गज मेटा के प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक और इंस्टाग्राम) पर दो करोड़ दैनिक सक्रिय यूजर्स की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। यूजर्स फीड की गिरती क्वालिटी, अत्यधिक विज्ञापनों और दोहराए गए कंटेंट से नाराज हैं। इस संकट से निपटने के लिए मेटा अब अपने एल्गोरिदम में बड़े बदलाव कर रहा है ताकि ओरिजिनल कंटेंट को प्राथमिकता दी जा सके। कई यूजर्स का कहना है कि अब दोस्तों और फॉलो किए गए अकाउंट्स की पोस्ट्स कम दिखाई देती हैं।

आखिर क्यों नाराज हैं यूजर्स? –
पिछले कुछ समय से यूजर्स लगातार शिकायत कर रहे हैं कि अब फेसबुक और इंस्टाग्राम की फीड अब पहले जैसी नहीं रही। यूजर्स मुख्य रूप से शिकायत कर रहे हैं कि फीड में जरूरत से ज्यादा विज्ञापन आने लगे है। साथ ही स्पॉन्सर्ड पोस्ट, बार-बार दिखाई देने वाला रिपीटेड कंटेंट और एल्गोरिदम आधारित Suggested Posts की भरमार हो रही है। इसके बाद दोस्तों और फॉलो किए गए अकाउंट्स की पोस्ट्स कम दिखने लगी है। कई यूजर्स का तो कहना है कि सोशल मीडिया अब सोशल कम एल्गोरिदम-ड्रिवन एंटरटेनमेंट ज्यादा बन गया है। एक्सपर्ट्स के अनुसार मेटा ने एंगेजमेंट बढ़ाने के लिए Recommended Content पर ज्यादा फोकस किया, लेकिन इससे यूजर एक्सपीरियंस प्रभावित हुआ।

विज्ञापनों की भरमार से बढ़ी यूजर थकान :-
एनालिटिक्स के अनुसार मेटा का बिजनेस मॉडल विज्ञापनों पर आधारित है, लेकिन अब यही रणनीति यूजर एक्सपीरियंस पर भारी पड़ती दिख रही है। यूजर्स को नियमित अंतराल पर स्पॉन्सर्ड एड्स और प्रमोशनल कॉन्टेंट दिखाई दे रहे हैं, जिससे ब्राउजिंग का अनुभव बाधित हो रहा है। कई यूजर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को Ad-heavy और Cluttered तक कहना शुरू कर दिया है।

बढ़ती आलोचना को देखते हुए मेटा अब अपने रिकमेंडेशन एल्गोरिदम में बदलाव कर रहा है। इंस्टाग्राम में बड़े बदलाव ओरिजिनल कंटेंट को ज्यादा प्राथमिकता दे रही है। इससे रिपोस्टेड और कम एडिटेड कंटेंट की Reach घटेगी।

. कॉपी-पेस्ट या अनऑरिजिनल अकाउंट्स की Visibility कम होगी।
. साथ ही रिकमेंडेशन सेक्शन को ज्यादा रेलिवेंट बनाने की कोशिश की जाएगी।
. घटने ऑडियंस को देखने के बाद कंपनी का लक्ष्य यूजर्स को ज्यादा यूनिक और विविध कंटेंट दिखाना है।
. इंस्टाग्राम के साथ-साथ फेसबुक पर भी कंटेंट रैंकिंग और फीड डिस्प्ले सिस्टम में सुधार की तैयारी चल रही है।

हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम पर घटते ऑडियंस ही एकलौती वजह नहीं है, बल्कि नए प्लेटफॉर्म्स से कड़ी टक्कर भी है। ये यूजर्स को अपनी फीड पर ज्यादा कंट्रोल देते हैं। मेटा के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती मोनेटाइजेशन (कमाई) और यूजर संतुष्टि के बीच सही संतुलन बनाना है। कई यूजर्स अब ऐसे प्लेटफॉर्म्स की ओर जा रहे हैं जहां फीड पर ज्यादा कंट्रोल मिल रहे हैं।
विज्ञापन कम हों।
. कम्युनिटी आधारित कंटेंट हो।
. एल्गोरिदम का हस्तक्षेप कम हो।

मेटा के सामने क्या चुनौतियां हैं? –
एक्सपर्ट्स का मानना है कि मेटा के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह मोनेटाइजेशन और यूजर संतुष्टि के बीच संतुलन कैसे बनाए रखे। अगर कंपनी विज्ञापनों को कम करती है तो रेवेन्यू प्रभावित हो सकता है, और अगर विज्ञापन बढ़ाती है तो यूजर्स दूर जा सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले महीनों में मेटा के एल्गोरिदम बदलाव तय करेंगे कि फेसबुक और इंस्टाग्राम अपनी लोकप्रियता बनाए रख पाएंगे या नहीं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button