चांदी की कीमतों ने दिया बड़ा झटका… तीन लाख के पार हुआ भाव, पायल कारखानों में लटक गए ताले

चांदी में आई तेजी ने सर्राफो का चैन छीन लिया है। एक तरफ बाजार से ग्राहक गायब हैं। 70 प्रतिशत तक बिक्री घट गई है। दूसरी तरफ पायल कारखानों में ताले लटक रहे हैं। घर पर पायल तैयार कराने के लिए कारीगरों को कच्चा माल देने से सर्राफ कतरा रहे हैं।
चांदी की मंडी कहे जाने वाले आगरा में सर्राफा कारोबार धड़ाम हो चुका है। सोमवार को चांदी एमसीएक्स पर तीन लाख प्रति किलो पहुंच गई। ऑल टाइम हाई चल रही चांदी में आई तेजी से कारोबारी परेशान हैं। शहर में 2500 से अधिक सर्राफा कारोबारी हैं। हर माह करीब 50 टन चांदी का कारोबार होता है। एक लाख से अधिक कारीगर जुड़े हुए हैं। कुटीर उद्योग की तरह घर-घर पायल बनाई जाती हैं। लेकिन, चांदी की चमक से बाजार में सन्नाटा पसरा है। सबसे बड़ा संकट पुराने माल का भुगतान रुक गया है। जिन कारोबारियों ने 20 या 30 किलो चांदी पायल बनाने के लिए कारीगरों को दी, वह भी उनसे वापस ली जा रही है। चांदी का अधिकांश कारोबार उधारी में होता था। तेजी के कारण माल नहीं बिक रहा। इस वजह से करोड़ों रुपये का भुगतान भी अधर में फंसा है।
तेजी से सहालग में हल्की हो गई पायल :-
एक तरफ भाव में तेजी और दूसरी तरफ सहालग। दो तरफा मार से जूझ रहे सर्राफा कारोबारी हल्के आभूषण बना रहे हैं। जहां पहले 100 से 200 ग्राम तक की पायल खरीदी जा रही थीं, वहीं अब 30 से 50 ग्राम वजन की पायलों की मांग है। इसकी वजह कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि है। कारोबारियों का कहना है कि तेजी से चांदी आभूषण की शुद्धता और गुणवत्ता दोनों पर विपरीत असर पड़ रहा है।
बंद पड़े हैं कारखाने :-
सर्राफा स्वर्णकार व्यावसायिक कमेटी के संरक्षक राजू मेहरा ने बताया कि पायल बनाने के कारखाने बंद पड़े हैं। उधारी पर जो माल दिया था, उसका भुगतान नहीं हो रहा। कच्चा माल देने से भी कारोबारी कतरा रहे हैं। फिलहाल चांदी में राहत नहीं।
बाजार में पसरा सन्नाटा :-
श्री सर्राफा कमेटी के महामंत्री देवेंद्र गोयल का कहना है कि किनारी बाजार, चौबे जी का फाटक समेत बाजारों में सन्नाटा पसरा है। सहालग के लिए बुकिंग भी बंद है। तेजी का यही आलम रहा तो कारोबार चौपट हो जाएगा।
आम आदमी पर बोझ :-
आगरा सर्राफा एसोसिएशन के अध्यक्ष नितेश अग्रवाल ने बताया कि चांदी कीमतों में वृद्धि से आम आदमी प्रभावित है। चांदी को गरीबों का सोना कहा जाता था। अब यह आम आदमी के बस से बाहर हो गई है। कारोबारियों को माल की चिंता सता रही है।




