उत्तराखंडराजनीति

जनगणना के नाम पर नहीं होगी ठगी, सभी प्रगणकों के पास होगी आईडी, QR कोड स्कैन कर मिलेगी जानकारी

उत्तराखंड प्रदेश में शुरू होने जा रही जनगणना के नाम पर ठगी न हो, इसके लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। वहीं ये भी स्पष्ट किया गया है कि जनगणना के दौरान आपकी जो जानकारी टीम लेगी, वह पूरी तरह से गोपनीय रहेगी। इसे किसी भी मंच, फोरम, कोर्ट में साझा नहीं किया जाएगा।

जैसे ही जनगणना शुरू होगी, वैसे ही कई तरह के ठग भी सक्रिय हो जाते हैं। चूंकि यह जनगणना केंद्र व राज्य सरकार संयुक्त रूप से करा रही है इसलिए राज्य के स्तर से इसमें एहतियाती तैयारियां की जा रही हैं। जनगणना निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि जनगणना की टीम जिस क्षेत्र में जाएगी, वहां के प्रधान, पार्षद, सभासद, गणमान्य लोगों से मिलेगी। उनके माध्यम से पूरे क्षेत्र में जनगणना टीम की जानकारी प्रसारित की जाएगी। इससे लोगों में कोई अनजान व्यक्ति का भय नहीं होगा।

इसी प्रकार, सभी प्रगणकों को एक विशेष आईडी दी जा रही है। इसमें एक क्यूआर कोड होगा। जैसे ही इसे स्कैन करेंगे तो आपको पता चलेगा कि वह प्रगणक किस विभाग का कर्मचारी है। वर्तमान में जनगणना में कहां ड्यूटी लगाई गई है। इससे सभी तरह के खतरे भी दूर हो जाएंगे। आईडी कार्ड को अपने मोबाइल से आसानी से स्कैन किया जा सकता है।

जनगणना की जानकारी रहेगी गोपनीय :-
निदेशक जनगणना ईवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि जनगणना में आप जो भी जानकारी देंगे, वह गोपनीय होगी। उसे आरटीआई में साझा नहीं कर सकते। पुलिस, कोर्ट या अन्य किसी भी मंच पर इसे साझा नहीं किया जाता। यहां तक कि केंद्र सरकार के पास यह जानकारी सांख्यिकीय रूप में रहेगी। जैसे किसी मोहल्ले के कितने बच्चे स्कूल जाते हैं, वह तो पता होगा लेकिन किसी व्यक्ति विशेष का बच्चा किस स्कूल में जाता है, उसकी जानकारी उजागर नहीं होगी।

जनगणना के आधार पर ही बनेगा विकास का खाका :-
आजाद भारत में पहली जनगणना वर्ष 1951 में हुई थी। इससे सरकार को पता चलता है कि लोगों की वास्तविक स्थिति क्या है। 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, एलपीजी की योजना, बिजली गांव-गांव में पहुंचाने जैसी तमाम योजनाएं शुरू की गईं। अब जनगणना के ताजा आंकड़ों से आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। सरकार को आगे हर क्षेत्र के विकास का रोडमैप बनाने में मदद मिलेगी।

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