
उत्तर प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। कैराना से सांसद इकरा हसन पर की गई टिप्पणी ने राजनीतिक और सामाजिक माहौल में उबाल ला दिया है। करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष योगेंद्र राणा द्वारा दिए गए बयान को लेकर खासतौर पर मुस्लिम समाज में जबरदस्त नाराज़गी देखी जा रही है। सोशल मीडिया पर इस टिप्पणी का विरोध तेज़ी से फैल रहा है और इसे महिला गरिमा और धार्मिक सौहार्द के खिलाफ बताया जा रहा है
जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आज़ाद अली ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने योगेंद्र राणा को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग करते हुए प्रशासन को चेतावनी दी है कि अगर इस पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो पार्टी देशव्यापी आंदोलन छेड़ेगी। आज़ाद अली ने कहा कि सांसद इकरा हसन पर की गई टिप्पणी केवल एक महिला नेता नहीं, बल्कि पूरे मुस्लिम समाज का अपमान है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
आज़ाद अली ने अपने बयान में स्पष्ट कहा कि यह केवल “जुबान फिसलने” का मामला नहीं है, बल्कि यह समाज को बांटने की एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन से मांग की है कि योगेंद्र राणा पर धार्मिक भावना भड़काने, महिला अपमान और सामाजिक तनाव फैलाने जैसे संगीन धाराओं में केस दर्ज किया जाए।
सांसद इकरा हसन को लेकर दिए गए इस बयान की देश के बुद्धिजीवी वर्ग और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी आलोचना की है। सोशल मीडिया पर भी आम जनता का गुस्सा साफ नजर आ रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद से ही इस पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।
आज़ाद अली ने मुस्लिम समुदाय से भी अपील की है कि वे संयम बरतें, लेकिन चुप ना रहें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सबको अपनी बात कहने का अधिकार है, पर संविधान के भीतर रहकर अपने हक की लड़ाई लड़नी होगी। उन्होंने कहा कि अगर इस बार भी ऐसे नेताओं पर लगाम नहीं लगी, तो यह प्रवृत्ति आगे चलकर और खतरनाक हो सकती है।
देश की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर हलचल साफ देखी जा रही है। अब नजरें इस पर टिकी हैं कि सरकार और प्रशासन इस संवेदनशील मामले में क्या रुख अपनाते हैं। क्या योगेंद्र राणा को उनके बयान के लिए कानूनी रूप से जवाबदेह ठहराया जाएगा, या यह मामला भी अन्य विवादों की तरह धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला जाएगा — यह देखना अभी बाकी है।




