उत्तर प्रदेश

उपभोक्ता विवाद परितोष आयोग सहारनपुर में आईसीआईसीआई बैंक को उपभोक्ता के 13 लाख 95000 दिए जाने का दिया आदेश।

  • साथ में ₹15000 मानसिक कष्ट, वह वाद व्यय के लिए ₹5000 दिए जाने का आदेश दिया है

सहारनपुर 17 मई 2026 – जिला उपभोक्ता विवाद परितोष आयोग के अध्यक्ष सतीश कुमार सदस्य नूतन शर्मा व राजीव शर्मा ने लेबर कॉलोनी निवासी उपभोक्ता सोनिया सैनी द्वारा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 वाद संख्या 19/22 पर आज निर्णय देते हुए आईसीआईसीआई बैंक को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए 13 लाख 95000 वापस दिए जाने के साथ मानसिक कष्ट व वाद व्यय के लिए ₹20000 भी दिए जाने का आदेश दिया है | निर्णय का स्वागत करते हुए विश्व उपभोक्ता संगठन भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष असगर आलम ने कहा है कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 उपभोक्ताओं के संरक्षण हेतु पर्याप्त है बस आवश्यकता उपभोक्ताओं के जागरूक रहने की है आज जागरूक उपभोक्ता ही सशक्त उपभोक्ता है |

असगर आलम ने बताया कि आईसीआईसीआई बैंक द्वारा उपभोक्ता के खाते से 16 लख रुपए जाल साजों के साथ मिलकर निकालने की उपभोक्ता द्वारा शिकायत की गई थी जिसके लिए जिला उपभोक्तावाद परितोष आयोग में वाद दर्ज किया गया | न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद परितोष आयोग सहारनपुर द्वारा दिए गए निर्णय के अनुसार प्रस्तुत मामले में पक्षकारों के मध्य यह तथ्य निरविदित है के विपक्षी के यहां चल रहे परिवादनी के खाता संख्या से भिन्न-भिन्न तारीखों पर दिनांक 23 -4 -21 से 7-5 -21 तक एन ई एफ टी के माध्यम से 16 लख रुपए की निकासी की गई लेकिन परिवादनी उपभोक्ता के अनुसार विवाद का बिंदु यह है कि अंकन 16 लख रुपए की यह धनराशि उसके द्वारा नहीं निकल गई बल्कि धोखाधड़ी के आधार पर जाल साजों द्वारा विपक्षी गण बैंक के कर्मचारियों से मिलकर निकाली गई।

धोखाधड़ी के संबंध में परिवादनी उपभोक्ता द्वारा साइबर क्राइम पुलिस थाना सहारनपुर पर दर्ज कराई गई प्रथम सूचना रिपोर्ट में विवेचना के दौरान साइबर सेल द्वारा विभिन्न खातों से 2,04000 की धनराशि परिवादनी उपभोक्ता के खाते में वापस जमा कर दी गई
इसके संबंध में परिवादनी उपभोक्ता की ओर से शिकायत व नोटिस दिए जाने पर भी विपक्षी बैंक द्वारा उपभोक्ता को यह धनराशि वापस नहीं की जिसके लिए विपक्षी उत्तरदाई है क्योंकि परिवादनी उपभोक्ता के साथ-साथ अन्य खातेदार भी इस विश्वास के साथ बैंक में अपनी धनराशि जमा करते हैं कि बैंक में जमा उनके धनराशि सुरक्षित रहेगी और यदि बैंक के सिस्टम में ही सेंधमारी कर खाता धारकों के खाते से धोखाधड़ी के आधार पर कोई धनराशि निकाल ली जाती है तो उसकी भरपाई के लिए खाता मेंटेन करने वाला बैंक ही उत्तरदाई होगा।

जब कि विपक्षी बैंक ने अपना पक्ष रखते हुए उपभोक्ता के खाते से निकासी होना स्वीकार किया और परिवाद में उल्लेखित अन्य कथनों को अस्वीकार करते हुए कहा की परिवादनी अपने उपरोक्त अकाउंट पर काफी समय से नेट बैंकिंग की सुविधा ली हुई थी नेट बैंकिंग की सुविधा अप्लाई करते समय उपभोक्ता द्वारा स्वयं अपना यूजरनेम व पासवर्ड बनाया जाता है जिसकी जानकारी केवल उपभोक्ता को होती है जब कोई व्यक्ति नेट बैंकिंग के माध्यम से किसी को एन.ई.एफ.टी. करता है तो वह नेट बैंकिंग में सबसे पहले बेनिफिशियरी की सारी जानकारी भरता है और उसके उपरांत 30 मिनट तक बैंक उसको होल्ड पर रखता है जिसे कूलिंग पीरियड कहा जाता है उसके उपरांत सॉफ्टवेयर स्वयं एक ओटीपी जनरेट कर उपभोक्ता के पास उसके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजता है और उक्त ओटीपी भरने के कुछ समय उपरांत पैसा बेनिफिशियरी के पास अंतरित हो जाता है उक्त ओटीपी की कोई जानकारी बैंक के पास नहीं होती परिवादनी के पास एसएमएस की सुविधा भी उपलब्ध थी प्रत्येक लेन-देन के बाद परिवादनी के पास एसएमएस अलर्ट भी आता है।

उक्त ट्रांजैक्शन के बाद परिवादनी के पास एसएमएस आया उपरोक्त समस्त धनराशि अलग-अलग तारीख को पर अंतरित हुई जिनमें गैप था किंतु उसके बावजूद परिवादनी उपभोक्ता ने कोई शिकायत उसे समय नहीं की विपक्षी बैंक को जैसे ही जानकारी मिली विपक्षी बैंक ने इंटरनल इंक्वारी शुरू की और पूरी जांच में यह तथ्य सामने आया के परिवादनी ने स्वयं उपरोक्त ट्रांजैक्शन की तथा इस समय विपक्षी बैंक द्वारा परिवादनी के अकाउंट में शैडो क्रेडिट दिखाए आरबीआई समय-समय पर ग्राहकों को मैसेज भेज कर जागृत करता है कि वह अपना ओटीपी पिन यूजर नेम किसी को भी शेयर ना करें परिवाद में उपभोक्ता ने जिन अकाउंट में रुपया अंतरित किया उनका परिवाद में पक्ष नहीं बनाया गया जिससे लगता है परिवादनी की उनसे साथ साठ घाट है परिवाद में उपभोक्ता पक्षकारों के संयोजन के दोष से बाधित है।

जब कि परिवादनी उपभोक्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में बैंक खाते का विवरण और परिवादनी उपभोक्ता द्वारा साइबर क्राइम की सूचना रिपोर्ट की कॉपी भी न्यायालय में प्रस्तुत की गई। जहां तक उपरोक्त के संबंध में परिवादनी उपभोक्ता के कथनों का प्रश्न है तो परिवादनी द्वारा परिवाद में उल्लेखित अपने कथनों के समर्थन में प्रस्तुत किए गए साक्षय रूपी शपथ पत्र में कहा कि परिवादनी नौकरी पेशा है और बेंगलुरु में रहते हुए बैलेंस फार्मा कंपनी में नौकरी करते हुए खाता संख्या द्वारा विपक्षी से धनराशि का लेनदेन करती चली आ रही है करोना अवधि में परिवादनी उपभोक्ता सहारनपुर स्थित अपने घर से ही कंपनी का कार्य कर रही थी लेकिन विपक्षी बैंक में स्थित परिवादनी के खाते से भिन्न-भिन्न तारीखों में 16 लख रुपए की धनराशि अन्य खातों में अंतरित कर दी इसकी जानकारी होने पर परिवादनी उपभोक्ता द्वारा तुरंत पुलिस थाना साइबर क्राइम सहारनपुर के साथ विपक्षी को भी सूचित किया विपक्षी गण के स्तर से कोई कार्रवाई न किए जाने पर परिवादनी द्वारा दिनांक को अपने अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस भी दिया लेकिन फिर भी विपक्षीगण द्वारा कोई कार्रवाई नहीं गई की गई जिसको बैंक द्वारा सेवा में कमी मानते हुए आज उपभोक्ता विवाद परितोष आयोग ने अपना निर्णय सुनाया जिसमें उपभोक्ता परिवादनी को निकल गई रकम के साथ₹15000 का अनुतोष और ₹5000 वाद व्यय के रूप में दिए जाने का आदेश दिया है।

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